Friday, November 25, 2011

चीन की अभागी खलनायिका

बीते साल भारत रंग महोत्सव में चीन की प्रस्तुति 'अमोरॉस लोटस पैन' का प्रदर्शन किया गया था। यह प्रस्तुति इस बात का अच्छा उदाहरण है कि कैसे शैलीगत प्रयोगों के साथ विषय के तनाव और प्रवाह को बरकरार रखा जा सकता है। प्रस्तुति की केंद्रीय किरदार पैन जिनलियान चीन के एक प्रसिद्ध क्लासिक उपन्यास की पात्र है। सामान्यतः उसकी एक खल-सुंदरी की छवि है, जो अपने पति को धोखा देती है। लेकिन निर्देशक चेन गांग उसकी त्रासदी को उसके व्यक्तित्व और भाग्य के टकराव के अनिवार्य परिणाम के तौर पर देखते हैं। उसकी त्रासदी से जुड़े कई सवाल हैं जिन्हें अंत में यह प्रस्तुति दर्शकों के आगे छोड़ जाती है।
मंच पर पीछे की ओर दरवाजे के आकार के फ्रेमों की एक दीवार है। प्रस्तुति के शुरू में एक फ्रेम में से एक पात्र निकलकर आता है और बताता है कि वो एक महान प्रतिभा वाला एक प्रसिद्ध लेखक है। इसी बीच उसके आसपास बहुत से लोग जमा हो जाते हैं और उससे उसके किरदार पैन जिनलियान और उसकी नियति को लेकर सवाल पूछते हैं। इसके कुछ देर बाद पैन जिनलियान खुद मंच पर दिखाई देती है जो छोटी उम्र में अनाथ हो गई थी और उसे झंग दाहू नाम के एक धनी व्यक्ति को बेच दिया गया था। लंबी दाढ़ी वाला कुटिल झंग दाहू उसे अपनी रखैल बनाने पर उतारू है, लेकिन उसके लगातार इनकार करने पर सजा के तौर पर वो उसकी शादी तीन इंच के वू दा से करा देता है। मंच पर झुककर चलने वाला वू दा तीन इंच का तो है साथ ही परले दरजे का कायर भी। तीन बदमाशों की एक टोली आकर दोनों पति-पत्नी को धमकाती और तोड़फोड़ करती है तो वो कुछ करने के बजाय उल्टे जिनलियान को भी उनका मुकाबला करने से रोकता है। इसी बीच शहर मे शेर को मार गिराने वाले जवान और खूबसूरत वू सांग की डुगडुगी पिट रही है। पता चलता है कि वू सांग तीन इंच के वू दा का भाई है। जिनलियान उसपर आसक्त है लेकिन वो उसके प्रणय निवेदन को ठुकरा कर अपनी नौकरी पर कहीं दूर निकल जाता है। इस बीच आशिकमिजाज जियान क्विंग जिनलियान पर डोरे डालता है और देखते देखते दोनों का मेलजोल शहर भर में चर्चा का विषय बन जाता है। लेकिन दोनों की शादी के दो ही रास्ते हैं। या तो वू दा जिनलियान को तलाक दे दे या जिनलियान उसे जहर दे दे। वू दा तलाक देने से इनकार कर देता है। उसके मुताबिक जो भी हो धागे को सुई के साथ-साथ ही रहना होता है। ऐसे में एक साजिश के तहत जिनलियान उसे जहर दे देती है। लेकिन उसके भाई वू सांग के लौटने पर वो अपना कृत्य कबूल करके उसके हाथों अपनी मौत भी कबूल कर लेती है। नाटक के अंत में कई पात्र आकर जिनलियान की नियति से संबंधित कई सवाल उठाते हैं कि उसे अपने पति को अपनी नियति समझते हुए उसी के साथ ही रहना चाहिए था, कि उसे आशिकमिजाज जियान क्विंग से प्रेम की पींगे नहीं बढ़ानी चाहिए थीं, कि उसे शुरू में ही पत्थरदिल झंग दाहू से ही शादी कर लेनी चाहिए थी, आदि-आदि। ये सवाल जिंदगी के बारे में सोचने के लिए निर्देशक की ओर से दर्शकों के लिए भी हैं।
प्रस्तुति अपनी सादगी, रोचकता और शिल्पगत विशिष्टता में खास है। यह चीन के पारंपरिक नाट्य की छवियों से युक्त शिल्प था। मंच पर पीछे की दीवार के अलावा सिर्फ एक ड्रम है। बीच-बीच में घर को दर्शाने के लिए एक मेज और कुर्सियां लाकर रख दी जाती हैं। पात्रों की वेशभूषा से लेकर प्रकाश योजना तक हल्के लाल और सफेद रंग का कंट्रास्ट एक स्निग्ध प्रभाव बनाता है। पात्रों की वेशभूषा और देहभाषा अपने में ही रोचकता का एक विषय है। तीन इंच का वू दा जब झंग दाहू के यहां पहुंचता है तो दाहू अपने नौकर को छोटा स्टूल लाने का निर्देश देता है, लेकिन वू दा बताता है कि स्टूल वो अपने साथ लेकर आया है। वू दा झुककर चलता है, झंग दाहू की कुटिलता उसकी दाढ़ी में से झांकती है। आशिकमिजाज क्विंग बगुले जैसी सफेद पोशाक में है। तीनों बदमाश भी अपनी मूंछ-दाढ़ी और अटपटी हरकतों में निश्चित छवियां बनाते हैं। प्रस्तुति का संगीत पक्ष और कोरियोग्राफी उसे म्यूजिकल ऑपेरा की सी रंगत देते हैं। जिनलियान के दुर्भाग्य और बाद में उसके प्रेम की स्थितियां गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से एक भावनात्मक विस्तार लेती हैं।

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